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मिथिलाक पर्यायी नाँवसभ

मिथिलाभाषाक (मैथिलीक) बोलीसभ

Saturday, 22 November 2014

मिथिलाक तीर्थ- बर्थ ओ पर्यटन स्थल - ‍‍९ --- उर्विजा कुण्ड आ जानकी मन्दिर, सीतामढ़ी


उर्विजा कुण्ड आ जानकी मन्दिरक किछु दृष्य
(जिला – सीतामढ़ी)

Photo © Dr. Shashidhar Kumar “Videha”
चित्र ©  डॉ॰ शशिधर कुमर ““विदेह”






















मिथिलाक तीर्थ- बर्थ ओ पर्यटन स्थल - ‍‍‍१० --- पुनौरा धाम, सीतामढ़ी


पुनौरा धामक किछु दृष्य
(जिला – सीतामढ़ी)

Photo © Dr. Shashidhar Kumar “Videha”
चित्र ©  डॉ॰ शशिधर कुमर ““विदेह”








Friday, 21 November 2014

পদ্য ৯৫ :- ओजोन


ओजोन




ओजोन – ओजोन बड्ड सुनै छी,
की थिक कने बताउ ।
सुनलहुँ बहुते किछु नञि बुझलहुँ,
हमरो किछु समझाउ ।।


एक तत्त्व थिक गैस रूपमे,
नाँव जकर ऑक्सीजन ।
दू परमाणुक युतिक अणु जे,
से परिचित ऑक्सीजन ।
गाछ-बिरिछ सभ जन्तु मनुक्खो,
इएह  साँसमे  लैत’छि ।
गाछ बिरिछ पुनि आन क्रियामे,
ऑक्सीजन  छोड़ैत’छि ।
ऑक्सीजन केर त्रिपरमाणुक,
युतिसँ बनल  ओजोन ।
साँस लेबा केर ऑक्सीजनसँ,
बिल्कुल अलग ओजोन ।

जँ एतबा धरि समझि गेलहुँ,
तँऽ  आगू  बात   बढ़ाउ ।
नञि बुझलहुँ - तँऽ सेहो बाजू,
की दिक्कत कतऽ बताउ ।।





तापक्रमक घट-बढ़ अनुसारेँ,
चारि पड़त वायुमण्डल केर ।
आन विशिष्ट गुणक आधारेँ,
   उपविभाग पुनि हर मण्डल केर ।
पहिल क्षोभ, समताप फेर,
आ  मध्य-ताप तेसर-चारिम ।
समतापक  उपरी सीमा  पर,
घटना  एक  घटय  बंकिम ।
सूर्यकिरण केर एक घटक जे,
पराबैगनी  किरण  कहाबय ।
तकरा अवशोषित कऽ एहि ठाँ,
ऑक्सीजन ओजोन बनाबय ।

ओजोनक  ई  जन्म - प्रक्रिया,
सुनि  कऽ ने अनठाउ ।
ई घटना  नञि थिक  मामूली,
मुँहकेँ जुनि  बिचकाउ ।।






ई ओजोन रहय ओहि ठाँ,
ने  ऊपर – नीचाँ   जाय ।
पातड़ सन स्तर बनबय, से
ओजोन   पड़त   कहाय ।
छत्ता सन धरती पर तानल,
ओ जीवन रक्षक बनइछ ।
दुष्ट पराबैगनी किरण केर,
ई सद्यः  भक्षक बनइछ ।
टूटय – बनय – पुनः टूटय,
ओजोनक अणु  निरन्तर ।
सन्तुलित निर्माण – ध्वंश,
तेँ बुझि ने पड़इछ अन्तर ।

पराबैगनी  अछि   गुनधुनमे,
भीतर  कोना कऽ जाउ ।
ओजोनक   अभेद्य   दुर्गमे,
कोना कऽ सेन्ह लगाउ ।।





एतबामे मानव विकाश केर,
शंखनाद    सौंसे   भेलै ।
औद्योगिक विकाशक परचम,
ओजोनहु   पर   फहरेलै ।
सी॰एफ॰सी॰ छल सेनापति,
ओ ओजोनक संहार केलक।
भूर बना ओजोन पड़तमे,
दुष्ट किरणकेँ बाट देलक ।
पराबैगनी जा धरती पर,
डी॰एन॰ए॰ पर घात करय ।
डी॰एन॰ए॰ गुणसूत्र जीवनक,
तकरे संग  उत्पात करय ।

कर्करोग  त्वक् सँ  सम्बन्धित,
बाढ़त  से बुझि जाउ ।
जल-थल-नभ-ऋतुचक्र एखनुका,
बदलत एकदम बाउ ।।





जँ भविष्यमे नञि चाही,
एहेन सन किछु बदलाव ।
बन्न करू हर एक घटक,जनि
सी॰एफ॰सी॰  सन  भाव ।
प्रशीतक ए॰सी॰ आ फ्रीज केर,
तत्क्षण  बदलल   जाए ।
प्रणोदक-रॉकेट ईन्धन केर,
हो   उपयुक्त   उपाय ।
एखनहु चेतब तँऽ बर्षो धरि,
क्षतिपुर्तिमे     लागत ।
जँ विलम्ब कनिञो होएत तँऽ,
हमसभ होएब अभागल ।

विकसित राष्ट्र सक्षम अधिभारक,
तेँ  अधिभार  उठाउ ।
अन्य राष्ट्र बिनु मुँह बिचकओने,

निज दायित्व निभाउ ।।


'विदेह' १६७ म अंक ० नवम्बर २०१४ (वर्ष ७ मास ८३ अंक १६५) मे प्रकाशित ।


পদ্য ৯४ :- प्रदूषण

प्रदूषण






प्रकर्षेण दूषित सभ किछु थिक,  अनारोग्य केर जननी ।
ई दैवक नञि छी प्रकोप, छी मनुक्खक अपनहि करनी ।।

कोनहु बस्तु जञो गन्दा भऽ गेल, दूषित ओ कहबैत’छि ।
प्रकर्षेण मतलब अतिशय अछि, सीमा – हद जनबैत’छि ।।

सीमासँ  बेसी  अबाज  जञो,  कहबै  ध्वनिक प्रदूषण ।
ऊँच सुनब, अनुनाद – नाद, बाधिर्य एकर अछि लक्षण ।।

दुषित हवा जञो साँस लेल तँऽ,  साँसक होएत  बेमारी ।
दमा – एलर्जी  आओर पता  नञि, की – की महामारी ।।

दुषित पानि पिउबा सँ जेसब, होइत’छि से बुझले अछि ।
पेट खड़ाब आ हैजा पेचिश,  सभटा देखले–सुनले अछि ।।

मृदा – भूमि  सेहो दूषित भऽ,  बहुते  करैछ  समस्या ।
कऽलक पानि आ खेतक उपजा, माहुर सनक अभक्ष्या ।।

रेडियोधर्मी  अछि पदार्थ जञो, विकिरण करय प्रदूषण ।
धरा – पानि तँऽ दूषित अछिए, सीधे  मारक  लक्षण ।।

एखनहुँ जँ संसार ने चेतत,  बदलत नञि निज करनी ।

हाथ ने किछु बाँचत भविष्यमे, अपन दशा पर कननी ।।



'विदेह' १६७ म अंक ० नवम्बर २०१४ (वर्ष ७ मास ८३ अंक १६५) मे प्रकाशित ।


Sunday, 24 August 2014