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मिथिलाक पर्यायी नाँवसभ

मिथिलाभाषाक (मैथिलीक) बोलीसभ

Monday, 25 January 2016

पद्य - ‍१४‍० - हँसुआ दाबी (बाल कविता)

हँसुआ दाबी (बाल कविता)




बड़की टा  केर  चिड़ै  उड़ै  छै,
नाम तँऽ  हँसुआ दाबी  छै
लोलक  किछु छी  बात विशेषें,
नाम  तेँ  हँसुआ दाबी  छै ।।

जञो  राखी  सोझाँमे  परस्पर,
दू   टा   कचिया  - हाँसूकेँ ।
बिनु   दाँतक  लागत   जेहेन,
बूझू  लोल  छै  ‘दाबी’  केर ।।*

नाँओ  पहिल बेर  सुनल, भेल
एहनो  होइतछि  की   नाम ?
गौरसँ  देखल,  तखन  बुझल,
वाह !  केहेन  सुन्नर  नाम ।।

पर  हँसुआ-दाबी  किछु एहनो,
लोल जकर  दुहु  सटल रहैछ ।
किछु तँऽ एक्कहि रंग देखबामे,
किछु विशेष ओ  अलग रहैछ।।*

पड़ती - जमकल पानि,  नहरि,
वा  पोखरि - डबरा   कातमे ।
पैघ  गाछ  पर  झुण्डे - झुण्डे,
रहैछ    बाद     बरसातमे ।।*

ठण्ढी - शीतलहरी  पछाति ओ,
धीरे - धीरे  कम भऽ जाइछ ।
कादो - पानि सुखाए जाइत छै,
तेँ कत्तहु अन्तऽ चलि जाइछ ।।*




संकेत आ किछु रोचक तथ्य -

* - हँसुआ दाबीक दुनु लोल बाहर सँ भीतर दिशि हल्का मुड़ल रहैत अछि, तेँ बन्न भेलाक बादहुँ बीचमे कने रिक्त वा खाली स्थान रहि जाइत अछि । देखला पर एहेन सनि लगैत अछि जे दू गोट कचिया हाँसू (जकर भीतरी भागमे दाँत नञि हो) परस्पर सोझाँ राखल हो । लोलक इएह गुण एहि चिड़ै केर मैथिली नामकरणक कारण बनल होयत । लोलक इएह गुणक कारण अंग्रेजीमे ओ ऑपेन बिल्ल्ड स्टॉर्क (OPEN BILLED STORK) कहबैत अछि ।

* - हँसुआ दाबीक लोलक ई विशिष्ट स्वरूप बाल्यावस्थासँ नञि रहैत अछि । बाल्यावस्थामे बन्न भेला पर ओकर दुहु लोल परस्पर सटि जाइत अछि । लोलमे एहि तरहक वक्रता (अन्तर्वक्रता) किशोरावस्थामे विकसित होइत अछि आ जीवनपर्यन्त रहैत अछि । अंग्रेजीक स्टॉर्क कहाबए बला किछु आओर जाति-प्रजाति जे देखबामे हँसुआ-दाबी सनि लगैत अछि पर जकर लोलकेँ बन्न भेला पर बीचमे रिक्त स्थान नञि रहैछ, सेहो मैथिलीक हँसुआ-दाबीक अन्तर्गत आबैत अछि । यथा - व्हाईट स्टॉर्क (WHITE STORK) आदि ।

* - ई बरसातक अन्तिम समयमे बहुत संख्यामे अपना दिशि देशक आन भाग ओ विदेशसँ अबैत अछि । ऊँच-ऊँच गाछ सभ पर खोंता बनबैत अछि आ पोखरि, डबरा, खत्ता, नहरि, नदीक कछेड़ अथवा कोनहु चऽर-चाँचरि जतऽ पानि जमकल हो आदि ठाम पर झुण्डक-झुण्ड देखाई देत । ओ कीड़ा-मकोड़ा, बेङ्ग आदि खाइत अछि परञ्च डोका (PILA) ओकरा बड़ पसिन्न छै । डोकाकेँ खएबाक लेल प्रायः ओ डोकाक खोलकेँ (कवचकेँ) तोड़ैत नञि अछि । ओ अपन लोलक विशिष्ट आकार आ संरचनाक मदतिसँ खोलकेँ (CONK SHELL / EXOSKELETON) बिना तोड़नहि डोकाक मूँह लऽग पकड़ि भितरुका कोमल भागकेँ बाहर झीकि लैत अछि ।

* - बेशी ठण्ढी वा शीतलहरी केर बाद अपना दिशि क्रमशः जलाशयक पानि कम होमए लगैत अछि, कादो बला स्थान केर कम भेलासँ हँसुआ-दाबी आ एहि तरहक आन चिड़ै लेल भोजनक प्रतिद्वन्द्विता बढ़ि जाइत अछि । तेँ ओ सभ आन जगह पर पलायन कऽ जाइत अछि । पर तइयो पुर्ण अलोपित नञि होइत अछि, थोड़-बहुत सलो भरि देखल जा सकैत अछि ।
यद्यपि अपना ओहि ठाँ मात्र एशियाई ऑपॅन बिल्ल स्टार्क (ASIAN OPENBILL STORK) पाओल जाइत अछि पर अफ्रिकी ऑपॅन बिल्ल स्टार्क (AFRICAN OPENBILL STORK) सेहो मैथिलीक “हँसुआ दाबी” नामक चिड़ै केर अन्तर्गत आओत ।




मिथिलाक किछु स्थान पर हँसुआ दाबी केँ घोंघफोड़ा सेहो कहल जाइत अछि जे एकर डोका आ घोंघाक प्रति सिनेहक परिचायक थिक पर वास्तविकतामे हँसुआ दाबी डोकाकेँ फोड़ि कऽ (CRUSH) नञि खाइत अछि ।


मैथिली पाक्षिक इण्टरनेट पत्रिका विदेह केर ‍194म अंक (‍15 जनबरी 2016) (वर्ष 9, मास 97, अंक ‍194) केर बालानां कृते स्तम्भमे प्रकाशित ।


पद्य - ‍१४‍१ - डोकहर (बाल कविता)

डोकहर (बाल कविता)





डोकहर ओ - जे डोका हेरए,
या  ताकए  जे डोका ।
डोकहर जाहिठाँ देखल जाइए,
पसरल  सौंसे  डोका ।।

इएह डोका देखि लोक बुझइए,
डोकहरकेँ  प्रिय  डोका ।
नाम देलक डोकहर,  पर बूझू
छी किछु हद से धोखा ।।*

डोकहर  केर  आवास - क्षेत्रमे,
हँसुआ - दाबी    संगे ।
हँसुआ - दाबीकेँ   प्रिय  डोका,
डोकहर  माथ  कलंके ।।*१,२

डोकहर पैघ चिड़ै - तइयो  ओ,
उड़ए    अकाशेँ   ऊँच ।
ऊँच  गाछ पर  खोंता  बनबए,
उतरए  झुण्डक - झुण्ड ।।

डोकहर केर  मजगूत टाँग  आ,
लोल   सेहो   मजगूत ।
बेङ्ग साँप काँकोड़  डोका  सभ,
चिबा  जाइछ   साबूत ।।*

एकर शिकार  वर्ज्य  भारत भरि,
छी   संरक्षित    प्राणी ।
तइयो लोक  कहाँ  मानैत  अछि,
करैछ  अपन  मनमानी ।।*



संकेत आ किछु रोचक तथ्य -

* - डोकहर आ हँसुआ-दाबीक आवास क्षेत्र (HABITAT) एक्कहि होइत अछि । ओहि ठाम जे मुइल डोकाक खोल (EXOSKELETON OF PILA) पसरल रहैत अछि जे वास्तवमे हँसुआ-दाबी द्वारा भक्षण कएल गेल डोकाक अवशेष थिक, नञि कि डोकहर द्वारा खाएल गेल डोकाक ।

* - डोकहर आ हँसुआ-दाबी दुनु डोका (PILA) खाइत अछि पर हँसुआ-दाबीकेँ डोका विशेष पसिन्न छैक । ओकर लोल केर अगिला भाग एना बनल छैक जे ओ डोकाक खोलकेँ बिना तोड़नहि डोकाक अगिला भागकेँ पकड़ि डोकाक भीतरुका कोमल भागकेँ बाहर झीकि लैत अछि आ खा जाइत अछि । डोकहर सेहो डोका खाइत अछि पर हँसुआ-दाबी जेकाँ ओकरा डोकासँ विशेष प्रीति नञि छै । दोसर बात जे डोकहर अपन मजगूत लोलसँ डोकाक उपरुका कवचकेँ तोड़ि कऽ डोका खाइत अछि, तेँ ओकरा द्वारा भक्षण कएल गेल डोकाक कवच टूटल रहैत अछि - साबुत नञि ।

* - एहि चिड़ै केर शिकार करब प्रतिबन्धित थिक पर गामक लोककेँ नियम-कानून कहाँ पता आ जँ बताओल जाइतो अछि तँऽ ओ से कहाँ मानैत छथि । ग्रामीण भागमे - विशेष कऽ जन-जातीय आ अशिक्षित वर्गमे - डोकहरक मांसु विशेष प्रचलित अछि ।


अंग्रेजीक GREATER ADJUTANT LESSER ADJUTANT दुनु मैथिलीक डोकहर शब्दक अन्तर्गत अबैत अछि । आइ काल्हि LESSER ADJUTANT बेशी देखबामे अबैत अछि कारण जे GREATER ADJUTANT केर संख्या अपेक्षाकृत बहुत कम भऽ गेल अछि । डोकहरक दुनु प्रजाति संकटग्रस्त अछि । LESSER ADJUTANT असुरक्षित (VULNERABLE) श्रेणीमे अबैत अछि जखनि कि GREATER ADJUTANT विलुप्तप्राय (ENDANGERED) श्रेणीमे ।



मैथिली पाक्षिक इण्टरनेट पत्रिका विदेह केर ‍194म अंक (‍15 जनबरी 2016) (वर्ष 9, मास 97, अंक ‍194) केर बालानां कृते स्तम्भमे प्रकाशित ।


पद्य - ‍१४२ - बगरा/बगड़ा (बाल कविता)

बगरा/बगड़ा (बाल कविता)





बगरा, बगरी आओर बगेड़ी,
तीनू अलग  चिड़ै छी ।
बगरी-बगेड़ी  बादमे कहियो,
बगरा एखन कहै छी ।।

घऽर आङ्गन खरिहानमे पहिने,
बगरा खूब  भेटै छल ।
बाँसक कोरो - धरणि - बरेड़ी,
खोंता ओ लगबै छल ।।

धिय-पुता  के  छल एहेन जे,
देखने नञि हो बगरा ।
नञि देखने बगरा केर खोंता,
आ बगरा केर बच्चा ।।

एक समय छल जहिया बगरा,
चहचहाइत छल सौंसे ।
घऽर आङ्गनमे जँ कोनो खोंता,
बगरा होयत अवश्ये ।।

आब तँऽ शहरक क्षेत्रसँ बूझू,
बगरा  भेल  निपत्ता ।
जञो पथार तखनहि गामहुमे,
छोट झुण्डमे बगरा ।।*

एना किए भेल पता ने ककरहु,
पर जँ रहलै एहिना ।
संग्रहालयमे काल्हि  देखत यौ,
बगरा सगरो दुनिञा !! *





संकेत आ किछु रोचक तथ्य -

* - अनाजक पथार सुखएबा काल जे बगरा अबैत अछि से प्रायः घरैया बगरा (HOUSE SPARROW) रहैत अछि जखनि कि खेत सभक आढ़ि पर या बाधसँ जाए बला कच्चा सड़क वा बान्ह पर जे बगरा भेटैत अछि से बनैया बगरा (TREE SPARROW) रहैत अछि ।

* -  बगराक संख्या ताहूमे खास कऽ घरैया बगराक संख्यामे पछिला ‍१० - २० सालमे बहुत कमी भेल अछि जकर कारण पुर्ण रूपसँ नञि ज्ञात अछि । पर ओकर आवास क्षेत्र (HABITAT) केर समाप्त होयब या कम होयब एकर कारण बताओल जा रहल अछि ।


मैथिली पाक्षिक इण्टरनेट पत्रिका विदेह केर ‍194म अंक (‍15 जनबरी 2016) (वर्ष 9, मास 97, अंक ‍194) केर बालानां कृते स्तम्भमे प्रकाशित ।


पद्य - ‍१५० - कोइली (बाल कविता)

कोइली (बाल कविता)




कोइली कोइली सभ बजैत छी, पर के - के छी देखने ? *
एक्कहि संगे बाजि उठल सभ, कोइली हम छी देखने ।।

जोतला खेतमे  वा  पड़तीमे,  पानि जतए छै लागल ।
कारी - कारी  बहुते कोइली,  नाङ्गरि बीचसँ काटल ।।*

नञि बौआसभ आ बुच्चीसभ,  ओ तँऽ छी  धनछुआ ।
कारी - कोइली, कारी - कौआ आ करिया - धनछुआ ।।

कोइली  चिड़ै  प्रवासी  छै  ओ  दूर  देशसँ  आबए ।
भरि बसंत रहि, बरखा बादहिं, पुरना देश ओ भागए ।।*

अबितहिं एहिठाँ गाछीमे  ओ  कू - कू राग अलापए ।
मज्जर, टिकला, आमक संग-संग ई आबाज हर्षाबए ।।

ऊँच गाछ पर  घनगर पातक  बीच नुका कऽ बैसए ।
तेँ मनुक्ख आबाज सुनए बस, कोकिल-छवि ने देखए।।

कोइली  खोंता नञि बनबए,  कौआ बनबैतछि खोंता ।
कोइली  ताहिमे अण्डा पाड़ए,  कौआ संग छै धोखा ।।*

कौआ फरक ने बूझि पाबए, अपना - आनक अण्डामे ।
अण्डे नञि,  ओ पोषए - पालए कोइलीयोक बच्चाकेँ ।।

पाँखि उगल बच्चा उड़ि भागल,  अपना झुण्डक संगे ।
कौआ मूर्ख बनल कानैत अछि, दुनिञा रंग - बिरंगे ।।*


संकेत आ किछु रोचक तथ्य -

*मैथिलीमे,
·        कोइली - कारी रंगक चिड़ैविशेष जे कि भारतीय ओ आन वाङ्गमयसभमे अपन मधुर आबाजक लेल प्रशिद्ध अछि । हिन्दीमे एकरा कोयल आ अंग्रजीमे कुक्कू (CUCKOO) कहल जाइत अछि ।
·        कोयली - आमक आँठीक भीतरमे उज्जर रंगक कोमल संरचनाविशेष ।
·        मैथिलीमे कोइलीकोयली श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द भेल । मतलब कि एहेन शब्दसभ जे सुनबामे एकरँगाह लगैत अछि पर ओकर अर्थ अलग−अलग होइत अछि ।




* - धियपुता सभ (आ किछु पैघ लोक सभ सेहो) कारी रंगक कारण भ्रमवश करिया धनछुआकेँ (BLACK DRONGO) कोइली कहि दैत छथि ।

* - देश = राजनैतिक सीमासँ अलग देश होयब जरूरी नञि = दूरस्थ स्थान वा भिन्न जलवायुबला क्षेत्रक द्योतक

* - सभ प्रकारक कोइली आ पपीहा शिशु-भरण परजीवी (BROODING PARASITE) होइत अछि । ओ अपन अण्डा कौआ, करिया धनछुआ, धनछुआ या एहि तरहक आन चिड़ैसभक खोंतामे दैत अछि जे कि शिशु-भरण पोषक (BROODING HOST) केर भूमिका निमाहैत अछि । शिशु-भरण परजीवी अपन अण्डा चोड़ा-नुका कऽ शिशु-भरण पोषकक खोंतामे दऽ दैत अछि आ शिशु-भरण पोषक अपन अण्डाक संग-संग परजीवीक अण्डाकेँ सेहो सऐत अछि, अण्डासँ बच्चाकेँ निखालेत अछि आ खोअबैत-पिउपैत अछि । उड़बा जोकर भेलापर परजीवी कोइली या पपीहाहक बच्चा अपना-अपना झुण्डमे भागि जाति अछि आ ताहि बच्चाकेँ भागि गेला पर स्त्री/मादा कौआकेँ उदास होइत सेहो देखल गेल अछि ।

अंग्रेजीक CUCKOO शब्द बहुत व्यापक अछि । एहि अन्तर्गत कोइली, पपीहा आदि बहुत रास गाबय बला चिड़ै सभ अबैत अछि । एकरा अन्तर्गत अंग्रेजीक KOEL / TRUE CUCKOOINDIAN CUCKOO शब्दसभसँ बोध होइबला चिड़ैसभकेँ राखब बेशी उचित होयत जे जीव-विज्ञानमे क्रमशः EudynamysCuculus वंशसभक (GENERA) सदस्य पक्षी अछि । ई दुनु तरहक चिड़ै भारतमे सेहो प्रायः हर भागमे पाओल जाइत अछि । ऊपरुका चित्रमे देखाओल कोइली Eudynamys वंशक अछि । सभ प्रकारक कोइली मे मात्र नर कोइलीये टा गबैत अछि संगहि पुरुष/नर-कोइलीक रंग कारी या अपेक्षाकृत गाढ़ रंगक होइत अछि तथा मादा/स्त्री-कोइली अपेक्षाकृत हल्लुक या कम गाढ़ रंगक होइत अछि ।


मैथिली पाक्षिक इण्टरनेट पत्रिका विदेह केर ‍194म अंक (‍15 जनबरी 2016) (वर्ष 9, मास 97, अंक ‍194) केर बालानां कृते स्तम्भमे प्रकाशित ।