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मिथिलाक पर्यायी नाँवसभ

मिथिलाभाषाक (मैथिलीक) बोलीसभ

Thursday, 5 January 2017

पद्य - ‍२‍१८ - अबोध बच्चा (बाल कविता)

अबोध बच्चा (बाल कविता)




टुकुर-टुकुर ओ ताकि रहल अछि ।
आँखिसँ दुनिञा नापि रहल अछि ।
एहि जग केर जगमगकेँ निहारैत, जग केर माया भाँपि रहल अछि ।।

बाल-गोपाल  स्वरूप छी बच्चा ।
सृष्टिक  कोमल रूप छी  बच्चा ।
छी  अबोध,  पर  बोध  कराबैछ,  भगवानक छवि-रूपकेँ बच्चा ।।

बच्चा नञि बस अगबहि बौआ ।
बच्चा  माने  बुच्ची आ बौआ ।
नेन्ना कोमल, कोमल नेनपन, देखि कऽ बिहुँसए आङ्गन कौआ ।।


मैथिली पाक्षिक इण्टरनेट पत्रिका विदेह केर ‍216म अंक (‍15  दिसम्बर 2016) (वर्ष 9, मास 108, अंक ‍216) केर बालानां कृते स्तम्भमे प्रकाशित ।


Monday, 12 December 2016

पद्य - ‍२‍१७ - ऊद या ऊदबिलाड़ि (बाल कविता)

ऊद या ऊदबिलाड़ि (बाल कविता)





कोना करै छै,  देखही  एकरा,
ऊदमति    धऽ    लेलकैए ।
की छी ऊद आ केहेन ऊदमति,
ककरा    धऽ    लेलकैए ??

ऊद छी जीव,  जमीनक बासी,
तइयो छै  बड़  पानि  प्रिय ।
पानिमे  हेलए,  डुम्मी काटए,
ओकरा छै  बड़  माछ प्रिय ।।

देहमे  ओकरा  बड़ छै  फुर्ती,
बुट्टी - बुट्टी   चमकै  छै ।
की जमीन, की पानिक भीतर,
मस्त - मगन ओ रमकै छै ।।

बैसि ने रहइछ  ओ  निचैनसँ,
पानिमे करइछ  बड़ छलमल ।
तेँ कहबी छै - ऊदमति धेलकै,
जकर  मोन  बेसी  चंचल ।।

ऊदमति  मोन  ने  रहए थीर,
लगले एम्हर, लगले ओम्हर ।
जेना  ऊद  ने  रहैछ  थीर,
एखने एम्हर, एखने ओम्हर ।।








संकेत आ किछु रोचक तथ्य -

ऊद वा ऊदबिलाड़ि मुख्यतः स्थलीय जीव अछि आ मीठ पानिक जलाशय सभसँ लऽ कऽ समुद्रक नोनगर पानि धरि भेटैछ । ओ मांसाहारी जीव अछि आ माछक शिकार करबामे बहुत माहिर होइत अछि । ओ पानिमे डुम्मी कटबामे आ गोंता लगएबामे अत्यन्त कुशल होइत अछि । बांग्लादेशमे एकरा पोशुआ बनाए प्रशिक्षित कएल जाइत अछि आ प्रशिक्षित ऊद मनुक्खक लेल नदीमेसँ माछ पकड़ि कऽ आनैत अछि । 



मैथिली पाक्षिक इण्टरनेट पत्रिका विदेह केर ‍212म अंक (‍15 अक्टूबर 2016) (वर्ष 9, मास 106, अंक ‍212) केर बालानां कृते स्तम्भमे प्रकाशित ।




Tuesday, 4 October 2016

पद्य - ‍२‍१६ - भाषा हमर पुरान अछि (कविता)

भाषा हमर पुरान अछि (कविता)



भाषा  हमर  पुरान  अछि ।
हमरा तकर  गुमान  अछि ।
मैथिली कोकिल आ कविशेखर केर रचना पहिचान अछि ।।

भक्ति-सिंगारक रसमे डूबल ।
शेष रसक पँचफोड़ना छीटल ।
कुञ्जभवन-साड़ी-गिरिधारी,  की एतबहि पहिचान अछि ??

साहित्यक भण्डार  बेस छै ।
जनसंख्या आधार  बेस छै ।
मुदा पढ़ौनीमे  तइयो नञि,  भेटि रहल  स्थान अछि ।।

क्षेत्र रहल दर्शन ओ ज्ञानक ।
रहल भूमि  नाना विज्ञानक ।
मैथिलीक साहित्य जगतमे,  तकर शुन्य स्थान अछि ।।

जँ ई छी जनजन केर भाषा ।
जँ निष्प्राण भेल नञि भाषा ।
तखन किए हर पत्र-पत्रिकाक, अबटी खेत परान अछि ।।

विद्वानक  भाषा   संस्कृत ।
अंग्रेजी - हिन्दी  सेहो नीक ।
भाषा बकलेलहाक मैथिली, एखनहु किए विधान अछि ??



सांध्य गोष्ठी (मैथिली अनियतकालीन पत्रिका) केर आठम पुष्प / अंक (अक्टूबर 2016) मे प्रकाशित ।


Sunday, 2 October 2016

पद्य - ‍२‍१५ - बिलाड़ि (बाल कविता)

बिलाड़ि (बाल-कविता)
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बाघक मौसी  कहै छी  जकरा,  तकरहि नाम बिलाड़ि छै ।
एक्कहि कुल केर  जीव दूनू छै,  बहुतहि छोट  बिलाड़ि छै ।।

छोट  ओकर  कद-काठी छै तेँ,  विचरि  रहल  निर्बाध छै ।
पैघ बिलाड़ि जेकाँ ओक्कर नञि, सिकुड़ि रहल साम्राज्य छै ।।

कखनहुँ म्याँउ-म्याँउ बाजैत अछि, खन गुम्हरैत आबाज छै ।
घऽर-आङ्गन  कि  बाध-बोन,  सभठाँ  मार्यारक  राज छै ।।

अपना  मिथिलामे  प्रशिद्ध  बड़,  गोनू झाक बिलाड़ि छै ।*
एतबा कीर्त्ति  जे  कहबी बनि गेल,  गोनू झाक बिलाड़ि छै ।।

मांसुभक्षी  आ  चतुर  शिकारी,  मूसक  करैछ  शिकार  छै ।
माछक  चाट  बहुत छै  ओकरा,  दूधक  सद्यः काल  छै ।।

जतए बिलाड़िक पहुँच असम्भव,  सीक एहेन निर्माण छै ।*
सीक टुटल  तँऽ  भाग बिलाड़िक,  तेँ ई कहबी विधान छै ।।

घर-आङ्गन जे भेटैछ हरदम, सएह कहबैछ बिलाड़ि छै ।
जंगल-झाड़  बिलाड़ि  रहैछ जे,  से तँऽ बन-बिलाड़ि छै ।।*

तेनुआ ओ जगुआर जेकाँ ओ,  गाछ चढ़एमे  माहिर  छै ।
ऊँच भवन ओ गाछ-बिरिछसँ, कूदि जाइछ जग-जाहिर छै ।।*


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संकेत आ किछु रोचक तथ्य -

* - गोनू झाक खिस्साक बिलाड़ि ततेक ने प्रशिद्ध भेल कि ओकरा नाम पर कहबीअहि बनि गेल ।

* - सीक वस्तुतः दूध, दऽही आ माखन आदिकेँ बिलाड़िसँ सुरक्षित रखबाक एकटा सस्ता लेकिन बहुत नीक उपाए छल ।

* - बिलाड़ि वस्तुतः मनुक्खहि केर परिवेशमे रहैत अछि आ जे जंगली परिवेशमे रहैत अछि से बनबिलाड़ि कहबैत अछि । बनबिलाड़िकेँ खटाँसु (उच्चारण - खटाँउस या खटौंस) अथवा खटाँस सेहो कहल जाइत अछि । मुदा खटाँसु या खटाँस शब्दक अन्तर्गत बनबिलाड़िक अतिरिक्त एकटा आन जन्तु सेहो अबैत अछि जकरा अंग्रेजीमे सीवेट (CEVET) कहल जाइत अछि । एकर गुणक आधार पर एकरा मैथिलीमे गन्हबिलाड़ि कहि सकैत छी (हलाँकि मैथिलीमे एकर ई नाँओ प्रचलित नञि अछि) ।

* - बिलाड़ि कुल (Family - FELIDAE) केर मात्र ४ टा सदस्य गाछ पर चढ़बामे माहिर होइत अछि । ओ चारू सदस्य अछि - तेन्दुआ (तेनुआ), जगुआर, बनबिलाड़ि आ स्वयं बिलाड़ि ।


मैथिली पाक्षिक इण्टरनेट पत्रिका विदेह केर ‍210म अंक (‍15 सितम्बर 2016) (वर्ष 9, मास 105, अंक ‍210) केर बालानां कृते स्तम्भमे प्रकाशित ।




पद्य - ‍२‍१४ - बनबिलाड़ि आ खटाँसु/खटाँस (बाल कविता)

बनबिलाड़ि खटाँसु/खटाँस
(बाल कविता)




छी बिलाड़ि ओ जे मनुक्ख केर,
घऽर - आङ्गन खरिहान  भेटैछ ।
आ  मनुक्ख  केर   परिवेशहिमे,
जकर  सभक  सन्तान  पलैछ ।।*

आन बिलाड़ि  जतेक जे  बाँचल,
बनबिलाड़ि केर  नाम  पाबैछ ।
बाध - बोन  जंगल  आ  झाड़मे,
बनबिलाड़ि  केर   बास  रहैछ ।।*

साँझ - परातहि  घुमैत - घामैत,
बाट - घाट   खरिहान   भेटैछ ।
छै   बिलाड़िसँ  पैघ - पुष्ट  ओ,
मोटका भोकना बिलाड़ि लागैछ ।।

एकरहि  तँऽ  यौ  गाम - घऽरमे,
दोसर   नाम  खटाँसु  कहैछ ।
पर  खटाँसु  शब्दक   परीधिमे,
आनहु  जन्तुक  नाँओ  आबैछ ।।*

तेँ  अर्थक  फरिछौठ  लेल  किछु,
होअए  उपाए  से  माँग  करैछ ।
जोड़ि  विशेषण, भिन्न  कएल तेँ,
अपन - अपन  दूनू नाम पबैछ ।।*

जे  खटाँसु   मार्यार   समूहक,
बनबिलाड़ि - खटाँसु”    भेलैक ।
अथवा   मांसुक   भक्षण   कारण,
मांसुभक्षी - खटाँसु    हेतैक ।।*

आन  समूहक  जे   खटाँसु  से,
मांसु  खाइछ,  फलाहार  करैछ ।
तेँ  अप्पन  गुण  केर अनुसारहि,
सर्वभक्षी - खटाँसु    भेलैक ।।*




संकेत आ किछु रोचक तथ्य -

* - मैथिलीमे जाहि जन्तुक नाम बिलाड़ि अछि से अंग्रेजी ढर्रा पर घरैया बिलाड़ि (DOMESTIC CAT / FERAL CAT) भेल किएक तँऽ ई मनुक्खक घऽर-आङ्गन खरिहान-दलान आदि स्थानहि पर रहैत अछि । वस्तुतः बिलाड़िक बेसीतर समय मनुक्खहि केर परिवेशमे बितैत अछि, ओकर बच्चासभ मनुक्खहि केर परिवेशमे जन्म लैत अछि आ पैघहु होइत अछि ।

* - आन बिलाड़िसभ जे मनुक्खक परिवेशसँ दूर बाध-बोन, जंगल-झाड़ आदिमे रहैत अछि आ जकर बच्चासभ ओही परिवेशमे जन्मैछ आ पलैछ-बढ़ैछ, तकरासभकेँ मैथिलीमे बनबिलाड़ि कहल जाइत अछि । ओ सभ साँझ-परात कहुखन-कहुखन मनुक्खक परिवेशमे या बाट-घाट पर घुमैत-फिरैत भेटि सकैत अछि पर बेसी काल मनुक्खक परिवेशसँ दूरहि रहैत अछि । बनबिलाड़ि बिलाड़िक अपेक्षा आकारमे थोड़ेक पैघ होइत अछि ।

* - बनबिलाड़िकेँ खटाँसु (उच्चारण - खटाँउस या खटौंस) अथवा खटाँस (कल्याणी कोशमे देल वर्तनीक अनुसार) सेहो कहल जाइत अछि । मुदा एहि शब्दक एकटा समस्या छैकखटाँसु या खटाँस शब्द बनबिलाड़ि समूहक जन्तुक अतिरिक्त एकटा आनहु जन्तुक लेल प्रयुक्त होइत अछि जकरा अंग्रेजीमे सीवेट (CIVET) कहल जाइत अछि ।

**- आजुक परिस्थितिमे एहि तरहक ओझराएल शब्दकेँ फरिछाएब आ फरिछाए कऽ परिभाषित करब आवश्यक । तेँ हम समानता ओ विषमताकेँ देखैत खटाँसु या खटाँसकेँ दू टा व्यापक समूहमे बाँटल अछि ।

*- खटाँसु (खटाँस) केर पहिल समूह भेल बनबिलाड़ि खटाँसु (खटाँस) जे कि ऊपर बनबिलाड़ि नामसँ परिभाषित कएल गेल अछि । ई जन्तुसभ बिलाड़ि कुल या मार्यार कुल (Family - FELIDAE) केर सदस्य अछि । ई सभ प्राकृतिक रूपसँ मुख्यतः मांसु केर भक्षण करैछ अर्थात मांसुभक्षी (CARNIVOROUS) होइत अछि । तेँ एकरासभकेँ मांसुभक्षी खटाँसु (खटाँस) सेहो कहि सकैत छी ।



*- खटाँसु (खटाँस) केर दोसर समूहकेँ हिन्दीमे गन्धबिलाव कहल जाइत अछि कारण जे एकर एकरासभमे कस्तुरी सनि सुगन्ह (सुगन्धि) होइत अछि । तेँ मैथिलीमे  गन्हबिलाड़ि (या सुगन्हबिलाड़ि) खटाँसु (खटाँस) कहि सकैत छी । मुदा ध्यातव्य जे गन्हबिलाड़ि कोनहु बिलाड़ि नञि छी आ नहिञे बिलाड़ि कुल या मार्यार कुल (Family - FELIDAE) सँ एकर कोनहु सम्बन्ध अछि । ई जन्तुसभ विवेराइडी कुल या गन्हबिलाड़ि कुल (Family - VIVERRIDAE) केर सदस्य अछि आ रातिचर होइत अछि । ई सभ प्राकृतिक रूपसँ मांसु आ संगहि संग फऽल (यथा - आम, चीकू, ताड़कून आदि) ओ घास-पातक भक्षण सेहो करैछ, मतलब कि ई सब नैसर्गिक रूपेँ सर्वभक्षी (OMNIVOROUS) होइत अछि । तेँ एकरासभकेँ सर्वभक्षी खटाँसु (खटाँस) सेहो कहि सकैत छी । बंगालीभाषामे एकरा न्धगोकूल या खाटोश कहल जाइत अछि ।



मैथिली पाक्षिक इण्टरनेट पत्रिका विदेह केर ‍210म अंक (‍15 सितम्बर 2016) (वर्ष 9, मास 105, अंक ‍210) केर बालानां कृते स्तम्भमे प्रकाशित ।